जिंदगी प्यार का गीत है

बदले से हैं अल्फाज तेरे॥
छुप गए हो क्या तुम मुझसे
या सच मे आ गई है दूरी?
या हो गई है कोई मजबूरी?

बढ़ गए क्या तुम अकेले?
फासले है ये कुछ अधूरे
थामने की कोशिश करू क्या तुम्हे?
की अब रास्ते रहेंगे हमारे भी अधूरे?

दूरियां फिर भी मंजूर होंगी
लेकिन ये तुम्हारा मसरूफ रहना नही 
बातें भले ही कम होंगी
लेकिन तेरे ख्यालों में ज़रूर घुमूंगी मैं।।

Comments

Popular posts from this blog

IN THE END, IT STAYS

BICKERINGS OF LOVE

I'M FINE.